गांधी भवन न्यास
विचार, संवाद और रचनात्मक कार्य का जीवंत केंद्र — जहाँ गांधी दर्शन व्यवहार बनता है।

केवल एक भवन नहीं — सामाजिक परिवर्तन का केंद्र
गांधी भवन न्यास, भोपाल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों, मूल्यों और रचनात्मक कार्यक्रमों को समाज के बीच जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से स्थापित एक स्वायत्त सार्वजनिक न्यास है।
महात्मा गांधी का भोपाल से विशेष संबंध रहा। सितंबर 1929 और 1933 की यात्राओं की स्मृतियों को स्थायी रूप देने के संकल्प से आगे चलकर गांधी भवन की स्थापना हुई।
इतिहास से स्थायी केंद्र तक
स्मृतियों को इतिहास के पन्नों से निकालकर एक जीवंत संस्था का रूप — तीन मुख्य मोड़।
गांधीजी का भोपाल प्रवास
नवाब हमीदुल्ला ख़ाँ के आमंत्रण पर राहत मंज़िल में ठहरे, सभाओं को संबोधित किया और समाज से संवाद स्थापित किया।
गांधी जन्मशताब्दी
मध्यप्रदेश में पदयात्राएँ, प्रभात फेरियाँ और रचनात्मक कार्यक्रम — स्थायी केंद्र का बीज यहीं पड़ा।
न्यास पंजीयन
4 अक्टूबर को मध्यप्रदेश पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम के अंतर्गत विधिवत पंजीयन — जीवंत संस्था की शुरुआत।
“रचनात्मक कार्यक्रम पूर्ण स्वराज को हासिल करने का मुकम्मल औज़ार है।”
— महात्मा गांधी
न्यास को गहराई से समझें
इतिहास, संचालन, कार्यक्रम और विरासत — एक ही भाषा में।
परिसर में आपका स्वागत है
भ्रमण करें, कार्यक्रमों में भाग लें, या न्यास कार्यालय से संपर्क करें।




