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गांधी भवन न्यास
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गांधी भवन न्यास · भोपाल

जहाँ हर धागा एक विचार बुनता है

गांधी भवन न्यास केवल एक भवन नहीं — विचार, संवाद, प्रशिक्षण, सेवा और सामाजिक परिवर्तन का स्वायत्त, स्वावलम्बी केंद्र है, जहाँ गांधी दर्शन को रोज़मर्रा के जीवन में उतारने का सतत प्रयास होता है।

कार्यक्रम देखेंबुकिंग करेंइतिहास जानें
1978न्यास पंजीयन
20+रचनात्मक कार्यक्रम
4000+पुस्तकालय संग्रह
80वृद्धाश्रम निवासी
गांधीजी और भोपाल

इतिहास से स्थायी केंद्र तक

महात्मा गांधी का भोपाल से पुराना और गहरा संबंध रहा। इन्हीं स्मृतियों को स्थायी रूप देने के संकल्प से गांधी भवन का जन्म हुआ।

गांधीजी जनसभा में

इतिहास

गांधीजी — जनसंवाद और चरखा

भोपाल की जनता के बीच गांधीजी का संवाद — चरखा, स्वदेशी और सामूहिक चेतना का जीवंत उदाहरण।

1929 · भोपाल

गांधीजी की ऐतिहासिक यात्रा

स्मृति

इतिहास की जीवंत स्मृतियाँ

यात्रा, जनसमूह और आस्था — वे क्षण जो आज भी गांधी भवन की नींव में बसते हैं।

1933 · यात्रा

सितंबर 1929

गांधीजी का पहला भोपाल प्रवास

तत्कालीन भोपाल रियासत के नवाब हमीदुल्ला ख़ाँ के आमंत्रण पर गांधीजी भोपाल आए, राहत मंज़िल में ठहरे, कई सभाओं को संबोधित किया और समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद स्थापित किया।

1933

हरिजन सेवा यात्रा के दौरान भोपाल जंक्शन पर पड़ाव

अहमदाबाद से यात्रा करते हुए गांधीजी भोपाल जंक्शन पर कुछ समय रुके। अल्प सूचना के बावजूद बड़ी संख्या में नागरिक स्टेशन पहुँचे, गांधीजी ने उन्हें संबोधित किया।

1969

गांधी जन्मशताब्दी वर्ष

मध्यप्रदेश में गांधी शताब्दी समारोह समिति के तहत पदयात्राएँ, प्रभात फेरियाँ, स्वच्छता अभियान, संगोष्ठियाँ और मेले आयोजित हुए। इन्हीं आयोजनों से बची राशि को स्थायी जनहित कार्य में लगाने का निर्णय लिया गया।

27 सितंबर 1970

स्वतंत्र न्यास गठन का निर्णय

गांधी शताब्दी राज्य स्तरीय समिति ने गांधी भवन के संचालन, संरक्षण एवं विकास के लिए एक स्वतंत्र सार्वजनिक न्यास बनाने का निर्णय लिया।

4 अक्टूबर 1978

गांधी भवन न्यास का विधिवत पंजीयन

मध्यप्रदेश पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत पंजीयन क्रमांक 4/बी-13/77-78 के साथ न्यास पंजीकृत हुआ — यहीं से गांधी भवन की यात्रा एक जीवंत सामाजिक संस्था के रूप में प्रारंभ हुई।

स्वायत्त · स्वावलम्बी

न्यास परिचय एवं संचालन

गांधी भवन न्यास पूर्णतः स्वायत्त व आर्थिक रूप से स्वावलम्बी है। न्यास को सरकार से कोई वार्षिक अनुदान प्राप्त नहीं होता — परिसर के अतिथि कक्षों व सभागृहों के सुविधा शुल्क तथा जनसहयोग से ही न्यास अपने संचालन का पूरा व्यय वहन करता है।

न्यास के कार्य संचालन हेतु कम से कम 7 और अधिकतम 11 न्यासी होते हैं, जिनमें से 3 पदाधिकारी नियुक्त किए जाते हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री न्यास के पदेन संरक्षक होते हैं।

"रचनात्मक कार्यक्रम पूर्ण स्वराज को हासिल करने का मुकम्मल औज़ार है" — महात्मा गांधी। आवश्यकता पड़ने पर इन कार्यक्रमों की संख्या 18 से 22 तक बढ़ाई जा सकती है, बशर्ते विचार की बुनियाद से छेड़छाड़ न हो।

संस्थापक न्यासीगण (1978)

न्यास पंजीयन के समय सहमत प्रन्यासी:

  • श्री शंभूनाथ शुक्ल
  • श्री दादाभाई नाईक
  • श्री काशीनाथ त्रिवेदी
  • श्री हेमदेव शर्मा
  • श्री श्यामलाल
  • श्री रामचन्द्र भार्गव
  • कु. लीला राय
  • श्री रविन्द्र व्यास
रचनात्मक कार्यक्रम

व्यक्तिगत चेतना से समाज निर्माण

सीमित संसाधनों और जनसहयोग से गांधी भवन न्यास निरंतर बीस से अधिक रचनात्मक कार्यक्रम संचालित करता है — युवा प्रशिक्षण से लेकर वृद्ध सेवा तक।

सभागार में श्रोतागण

युवा

युवा चेतना व शिविर

महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए प्रायोगिक प्रशिक्षण, संवाद और सामूहिक अनुभव।

दिसंबर–मार्च

संगोष्ठी कार्यक्रम

संवाद

संवाद एवं संगोष्ठियाँ

गांधी विचार को समकालीन संदर्भ में गढ़ने वाले संवाद, गोष्ठियाँ और सामूहिक चिंतन।

वर्ष भर

01

युवा चेतना व कौशल विकास

दिसंबर–मार्च तक महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए साप्ताहिक प्रायोगिक प्रशिक्षण, जिसमें प्रतिवर्ष 400–500 विद्यार्थी भाग लेते हैं।

02

कला शिविर

ग्रीष्मकालीन 15–20 दिवसीय शिविर — योग, शास्त्रीय व लोक नृत्य, संगीत, नाटक, चित्रकला व क्राफ्ट में रुचि जगाने हेतु।

03

इंटर्नशिप कार्यशाला

10–15 दिवसीय कार्यशाला जहाँ सामाजिक संगठनों के काम में हाथ बँटाते हुए व्यावहारिक कौशल व वैचारिक संवाद सीखा जाता है।

04

युवा शिविर

3–5 दिवसीय प्रदेश/राष्ट्र स्तरीय शिविर, जहाँ गांधी विचारकों के साथ संवाद कर व्यक्तित्व व सामाजिकता का विकास होता है।

05

महिला कौशल प्रशिक्षण

परिसर में दो संस्थाओं के सहयोग से जरी-जरदोज़ी, सैनिटरी नैपकिन व सिलाई का रोज़गार-परक प्रशिक्षण।

06

वृद्धाश्रम

शाहजहाँनाबाद, गोलघर के निकट संचालित वृद्धाश्रम में 80 बुज़ुर्ग निवासरत हैं, जिनकी सेवा में 18 सदस्यीय स्टाफ जुटा है।

07

पुस्तकालय

लगभग 4000 पुस्तकों का निःशुल्क संग्रह — सर्वोदय साहित्य, गांधी वाङ्मय, हिन्दी व कबीर साहित्य सहित।

08

प्रार्थना सभा

प्रतिदिन प्रातः 10:30 बजे सर्वधर्म प्रार्थना — धर्म, जाति व भाषा से परे शांति व सद्भाव का अभ्यास।

09

सर्वोदय संवाद

विद्यालयों/महाविद्यालयों में वरिष्ठ गांधीजनों के साथ संवाद — इस वर्ष लगभग 10 संस्थानों में आयोजित।

10

"आओ जानें गांधी को" — गांधी सप्ताह

निबंध लेखन, चित्रकला व भजन जैसी सात दिवसीय प्रतियोगिताएँ, गांधी जयंती पर पुरस्कार वितरण के साथ।

11

गांधी ज्ञान प्रतियोगिता

गांधी पुण्यतिथि (30 जनवरी) के पूर्व भोपाल के विद्यालयों में प्रतियोगिताएँ — इस वर्ष 11 विद्यालयों के लगभग 500 विद्यार्थियों की सहभागिता।

12

सामाजिक संगठनों का सभा भवन

नाममात्र सुविधा शुल्क पर ठहरने व सभा हेतु उपलब्ध भवन — कुछ हॉल पूर्णतः निःशुल्क भी।

13

महापुरुषों की स्मृति गोष्ठियाँ

गांधी, विनोबा भावे, जयप्रकाश नारायण, कस्तूरबा, नेहरू, शास्त्री, पटेल आदि की स्मृति में संगोष्ठियाँ।

14

गांधीजन सम्मेलन

वार्षिक आयोजन जहाँ प्रदेशभर के रचनात्मक कार्यकर्ता गांधी-विचार को समकालीन संदर्भ में गढ़ने पर विचार-विमर्श करते हैं।

15

समसामयिक कार्यक्रम एवं संवाद

मणिपुर हिंसा, महिला हिंसा व संविधान के 75 वर्ष जैसे विषयों पर संवाद व संगोष्ठियाँ।

16

शैक्षणिक भ्रमण

चित्र प्रदर्शनियों व बापू की समाधि प्रतिकृति के दर्शन हेतु विद्यार्थी समूहों के नियमित भ्रमण।

17

बाल उत्सव

पं. नेहरू की जयंती (14 नवंबर) पर बच्चों की रचनात्मक क्षमता को मंच देने वाला वार्षिक बाल मेला।

18

राष्ट्रीय गांधी जैविक उत्सव

3-दिवसीय मेला — जैविक उत्पाद, मोटे अनाज, पारंपरिक व्यंजन व हस्तशिल्प, छोटे उत्पादकों व किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु।

19

सामूहिक श्रमदान

प्रत्येक बुधवार स्वैच्छिक श्रमदान — श्रम की गरिमा व सामूहिक उत्तरदायित्व के गांधीवादी मूल्य का अभ्यास।

20

चरखा अभ्यास एवं प्रशिक्षण

अंबर चरखा, पेटी चरखा व गांधी चरखा पर सूत कताई तथा खादी के आर्थिक-सामाजिक महत्व का प्रशिक्षण।

आश्रम परंपरा और ज्ञान
ज्ञान का केंद्र

पुस्तकालय व पुस्तक घर

गांधी भवन परिसर का समृद्ध पुस्तकालय सर्वोदय साहित्य, गांधी वाङ्मय, हिन्दी व कबीर साहित्य तथा धार्मिक ग्रंथों का संग्रह समेटे है। सुविधा पूर्णतः निःशुल्क है और विद्यार्थी व शोधार्थी नियमित रूप से यहाँ अध्ययन हेतु आते हैं।

4,000+पुस्तकें
10–5दैनिक समय
निःशुल्कप्रवेश

पुस्तकालय खोलें

सर्वधर्म प्रेरणा स्थल
प्रतिदिन प्रातः 10:30

सर्वधर्म प्रार्थना सभा

"मैं केवल एक तानाशाह से डरता हूँ — वह है मेरी अंतरात्मा की आवाज़।"

महात्मा गांधी के जीवन में प्रार्थना का विशेष स्थान था — सरल, सहज, आडंबर-रहित। उन्हीं मूल्यों को जीवित रखते हुए गांधी भवन न्यास में प्रतिदिन सर्वधर्म प्रार्थना होती है।

सेवा और सामाजिक समारोह
सामाजिक न्याय विभाग के सहयोग से

वृद्धाश्रम

"अपने आपको जानने के लिए खुद को दूसरे की सेवा में खो दो" — इसी भावना से प्रेरित होकर न्यास शाहजहाँनाबाद (गोलघर के निकट) में वृद्धाश्रम संचालित करता है। वर्तमान में यहाँ 80 बुज़ुर्ग निवासरत हैं।

80निवासी
18सेवाकर्मी
स्थायी प्रदर्शनियाँ

गांधी दर्शन को देखा जा सकता है

गांधी भवन परिसर में महात्मा गांधी के जीवन-मूल्यों पर आधारित चित्र प्रदर्शनियाँ व बापू की समाधि की प्रतिकृति स्थापित है।

सभागार में कार्यक्रम

कार्यक्रम

सभागार में कार्यक्रम

परिसर के सभागार में विचार, संवाद और रचनात्मक गतिविधियों का नियमित मंच।

परिसर

सर्वधर्म प्रेरणा स्थल

आस्था

सर्वधर्म प्रेरणा स्थल

धर्म, जाति और भाषा से परे शांति व सद्भाव का जीवंत प्रतीक।

प्रार्थना

गांधी प्रतिमा · परिसर

परिसर

गांधी प्रतिमा · परिसर

बापू की प्रतिमा — परिसर में प्रेरणा का स्थायी केंद्र।

भोपाल

बापू की प्रतिमा

स्मृति

बापू की प्रतिमा

उद्यान में स्थापित प्रतिमा — विचार और शांति का मौन संदेश।

उद्यान

परिसर दृश्य

परिसर

परिसर दृश्य

गांधी भवन परिसर — जहाँ इतिहास और वर्तमान एक साथ चलते हैं।

न्यास

संगोष्ठी एवं संवाद

संवाद

संगोष्ठी एवं संवाद

महापुरुष स्मृति गोष्ठियाँ और समसामयिक विषयों पर विचार-विमर्श।

वर्ष भर

संग्रहालय देखें

संपर्क करें

गांधी भवन न्यास से जुड़ें

कार्यक्रमों में भागीदारी, सभागृह आरक्षण, स्वयंसेवा अथवा सहयोग हेतु हमसे संपर्क करें।

पता व समय

  • पतागांधी भवन, भोपाल, मध्यप्रदेश
  • पुस्तकालय समयप्रातः 10:00 — सायं 05:00 (प्रतिदिन)
  • प्रार्थना सभाप्रतिदिन प्रातः 10:30 बजे
  • पुस्तक घरप्रातः 10:00 — सायं 05:00 (प्रतिदिन)

डेमो फ़ॉर्म — पूरा संपर्क /contact पर भी उपलब्ध है।

गांधी भवन न्यास

विचार, संवाद और रचनात्मक कार्य का जीवंत केंद्र — भोपाल, मध्यप्रदेश। स्थापित 1978, मध्यप्रदेश पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत पंजीकृत।

न्यास

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© 2026 गांधी भवन न्यास, भोपाल। सर्वाधिकार सुरक्षित।बापू के विचारों के साथ, आज भी।

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