
इतिहास
गांधीजी — जनसंवाद और चरखा
भोपाल की जनता के बीच गांधीजी का संवाद — चरखा, स्वदेशी और सामूहिक चेतना का जीवंत उदाहरण।
गांधी भवन न्यास केवल एक भवन नहीं — विचार, संवाद, प्रशिक्षण, सेवा और सामाजिक परिवर्तन का स्वायत्त, स्वावलम्बी केंद्र है, जहाँ गांधी दर्शन को रोज़मर्रा के जीवन में उतारने का सतत प्रयास होता है।
महात्मा गांधी का भोपाल से पुराना और गहरा संबंध रहा। इन्हीं स्मृतियों को स्थायी रूप देने के संकल्प से गांधी भवन का जन्म हुआ।

इतिहास
भोपाल की जनता के बीच गांधीजी का संवाद — चरखा, स्वदेशी और सामूहिक चेतना का जीवंत उदाहरण।

स्मृति
यात्रा, जनसमूह और आस्था — वे क्षण जो आज भी गांधी भवन की नींव में बसते हैं।
तत्कालीन भोपाल रियासत के नवाब हमीदुल्ला ख़ाँ के आमंत्रण पर गांधीजी भोपाल आए, राहत मंज़िल में ठहरे, कई सभाओं को संबोधित किया और समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद स्थापित किया।
अहमदाबाद से यात्रा करते हुए गांधीजी भोपाल जंक्शन पर कुछ समय रुके। अल्प सूचना के बावजूद बड़ी संख्या में नागरिक स्टेशन पहुँचे, गांधीजी ने उन्हें संबोधित किया।
मध्यप्रदेश में गांधी शताब्दी समारोह समिति के तहत पदयात्राएँ, प्रभात फेरियाँ, स्वच्छता अभियान, संगोष्ठियाँ और मेले आयोजित हुए। इन्हीं आयोजनों से बची राशि को स्थायी जनहित कार्य में लगाने का निर्णय लिया गया।
गांधी शताब्दी राज्य स्तरीय समिति ने गांधी भवन के संचालन, संरक्षण एवं विकास के लिए एक स्वतंत्र सार्वजनिक न्यास बनाने का निर्णय लिया।
मध्यप्रदेश पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत पंजीयन क्रमांक 4/बी-13/77-78 के साथ न्यास पंजीकृत हुआ — यहीं से गांधी भवन की यात्रा एक जीवंत सामाजिक संस्था के रूप में प्रारंभ हुई।
गांधी भवन न्यास पूर्णतः स्वायत्त व आर्थिक रूप से स्वावलम्बी है। न्यास को सरकार से कोई वार्षिक अनुदान प्राप्त नहीं होता — परिसर के अतिथि कक्षों व सभागृहों के सुविधा शुल्क तथा जनसहयोग से ही न्यास अपने संचालन का पूरा व्यय वहन करता है।
न्यास के कार्य संचालन हेतु कम से कम 7 और अधिकतम 11 न्यासी होते हैं, जिनमें से 3 पदाधिकारी नियुक्त किए जाते हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री न्यास के पदेन संरक्षक होते हैं।
"रचनात्मक कार्यक्रम पूर्ण स्वराज को हासिल करने का मुकम्मल औज़ार है" — महात्मा गांधी। आवश्यकता पड़ने पर इन कार्यक्रमों की संख्या 18 से 22 तक बढ़ाई जा सकती है, बशर्ते विचार की बुनियाद से छेड़छाड़ न हो।
न्यास पंजीयन के समय सहमत प्रन्यासी:
सीमित संसाधनों और जनसहयोग से गांधी भवन न्यास निरंतर बीस से अधिक रचनात्मक कार्यक्रम संचालित करता है — युवा प्रशिक्षण से लेकर वृद्ध सेवा तक।

युवा
महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए प्रायोगिक प्रशिक्षण, संवाद और सामूहिक अनुभव।

संवाद
गांधी विचार को समकालीन संदर्भ में गढ़ने वाले संवाद, गोष्ठियाँ और सामूहिक चिंतन।
दिसंबर–मार्च तक महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए साप्ताहिक प्रायोगिक प्रशिक्षण, जिसमें प्रतिवर्ष 400–500 विद्यार्थी भाग लेते हैं।
ग्रीष्मकालीन 15–20 दिवसीय शिविर — योग, शास्त्रीय व लोक नृत्य, संगीत, नाटक, चित्रकला व क्राफ्ट में रुचि जगाने हेतु।
10–15 दिवसीय कार्यशाला जहाँ सामाजिक संगठनों के काम में हाथ बँटाते हुए व्यावहारिक कौशल व वैचारिक संवाद सीखा जाता है।
3–5 दिवसीय प्रदेश/राष्ट्र स्तरीय शिविर, जहाँ गांधी विचारकों के साथ संवाद कर व्यक्तित्व व सामाजिकता का विकास होता है।
परिसर में दो संस्थाओं के सहयोग से जरी-जरदोज़ी, सैनिटरी नैपकिन व सिलाई का रोज़गार-परक प्रशिक्षण।
शाहजहाँनाबाद, गोलघर के निकट संचालित वृद्धाश्रम में 80 बुज़ुर्ग निवासरत हैं, जिनकी सेवा में 18 सदस्यीय स्टाफ जुटा है।
लगभग 4000 पुस्तकों का निःशुल्क संग्रह — सर्वोदय साहित्य, गांधी वाङ्मय, हिन्दी व कबीर साहित्य सहित।
प्रतिदिन प्रातः 10:30 बजे सर्वधर्म प्रार्थना — धर्म, जाति व भाषा से परे शांति व सद्भाव का अभ्यास।
विद्यालयों/महाविद्यालयों में वरिष्ठ गांधीजनों के साथ संवाद — इस वर्ष लगभग 10 संस्थानों में आयोजित।
निबंध लेखन, चित्रकला व भजन जैसी सात दिवसीय प्रतियोगिताएँ, गांधी जयंती पर पुरस्कार वितरण के साथ।
गांधी पुण्यतिथि (30 जनवरी) के पूर्व भोपाल के विद्यालयों में प्रतियोगिताएँ — इस वर्ष 11 विद्यालयों के लगभग 500 विद्यार्थियों की सहभागिता।
नाममात्र सुविधा शुल्क पर ठहरने व सभा हेतु उपलब्ध भवन — कुछ हॉल पूर्णतः निःशुल्क भी।
गांधी, विनोबा भावे, जयप्रकाश नारायण, कस्तूरबा, नेहरू, शास्त्री, पटेल आदि की स्मृति में संगोष्ठियाँ।
वार्षिक आयोजन जहाँ प्रदेशभर के रचनात्मक कार्यकर्ता गांधी-विचार को समकालीन संदर्भ में गढ़ने पर विचार-विमर्श करते हैं।
मणिपुर हिंसा, महिला हिंसा व संविधान के 75 वर्ष जैसे विषयों पर संवाद व संगोष्ठियाँ।
चित्र प्रदर्शनियों व बापू की समाधि प्रतिकृति के दर्शन हेतु विद्यार्थी समूहों के नियमित भ्रमण।
पं. नेहरू की जयंती (14 नवंबर) पर बच्चों की रचनात्मक क्षमता को मंच देने वाला वार्षिक बाल मेला।
3-दिवसीय मेला — जैविक उत्पाद, मोटे अनाज, पारंपरिक व्यंजन व हस्तशिल्प, छोटे उत्पादकों व किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु।
प्रत्येक बुधवार स्वैच्छिक श्रमदान — श्रम की गरिमा व सामूहिक उत्तरदायित्व के गांधीवादी मूल्य का अभ्यास।
अंबर चरखा, पेटी चरखा व गांधी चरखा पर सूत कताई तथा खादी के आर्थिक-सामाजिक महत्व का प्रशिक्षण।

गांधी भवन परिसर का समृद्ध पुस्तकालय सर्वोदय साहित्य, गांधी वाङ्मय, हिन्दी व कबीर साहित्य तथा धार्मिक ग्रंथों का संग्रह समेटे है। सुविधा पूर्णतः निःशुल्क है और विद्यार्थी व शोधार्थी नियमित रूप से यहाँ अध्ययन हेतु आते हैं।

"मैं केवल एक तानाशाह से डरता हूँ — वह है मेरी अंतरात्मा की आवाज़।"
महात्मा गांधी के जीवन में प्रार्थना का विशेष स्थान था — सरल, सहज, आडंबर-रहित। उन्हीं मूल्यों को जीवित रखते हुए गांधी भवन न्यास में प्रतिदिन सर्वधर्म प्रार्थना होती है।

"अपने आपको जानने के लिए खुद को दूसरे की सेवा में खो दो" — इसी भावना से प्रेरित होकर न्यास शाहजहाँनाबाद (गोलघर के निकट) में वृद्धाश्रम संचालित करता है। वर्तमान में यहाँ 80 बुज़ुर्ग निवासरत हैं।
गांधी भवन परिसर में महात्मा गांधी के जीवन-मूल्यों पर आधारित चित्र प्रदर्शनियाँ व बापू की समाधि की प्रतिकृति स्थापित है।

कार्यक्रम
परिसर के सभागार में विचार, संवाद और रचनात्मक गतिविधियों का नियमित मंच।

आस्था
धर्म, जाति और भाषा से परे शांति व सद्भाव का जीवंत प्रतीक।

परिसर
बापू की प्रतिमा — परिसर में प्रेरणा का स्थायी केंद्र।

स्मृति
उद्यान में स्थापित प्रतिमा — विचार और शांति का मौन संदेश।

परिसर
गांधी भवन परिसर — जहाँ इतिहास और वर्तमान एक साथ चलते हैं।

संवाद
महापुरुष स्मृति गोष्ठियाँ और समसामयिक विषयों पर विचार-विमर्श।
कार्यक्रमों में भागीदारी, सभागृह आरक्षण, स्वयंसेवा अथवा सहयोग हेतु हमसे संपर्क करें।